बजट 2026–27: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को बड़ी राहत, मुआवजे के ब्याज पर अब नहीं लगेगा इनकम टैक्स
सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और घायल पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026–27 में अहम घोषणा की है। उन्होंने ऐलान किया कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त होगा। इसके साथ ही इस ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यानी टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजे की पूरी राशि मिले और उसमें टैक्स के रूप में कोई कटौती न हो। अब तक ब्याज को टैक्स योग्य मानने के कारण पीड़ितों को मिलने वाली कुल रकम में कमी आ जाती थी, जिससे उन्हें इलाज, पुनर्वास और आजीविका से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए आम बजट के दौरान की गई। बजट 2026–27 में टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से कई अहम प्रावधान किए गए हैं, जिनमें मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर ब्याज को टैक्स फ्री करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। चूंकि मुआवजे के मामलों में फैसला आने में अक्सर वर्षों का समय लग जाता है, ऐसे में ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती थी। इस बढ़ी हुई राशि पर टैक्स लगने से पीड़ितों या उनके परिवारों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।
कई मामलों में पीड़ितों को न सिर्फ ब्याज पर टैक्स देना पड़ता था, बल्कि टीडीएस कटने के बाद टैक्स रिफंड के लिए लंबी और जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था। इससे पहले से संकट में फंसे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती थीं। खासतौर पर गंभीर रूप से घायल या कमाऊ सदस्य को खो चुके परिवारों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह टैक्स छूट केवल ‘नेचुरल पर्सन’, यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले मुआवजे के ब्याज पर ही लागू होगी। सरकार ने इसे मुआवजे की मानवीय भावना से जुड़ा फैसला बताया है, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को वास्तविक राहत मिल सके।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।” उनके इस बयान के बाद सदन में इस फैसले को सकारात्मक कदम के रूप में देखा गया।
सरकार के अनुसार यह नया प्रावधान वित्त वर्ष 2026–27 से लागू होने की उम्मीद है। इसके लागू होते ही चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी और मुआवजे की रकम पहले की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होगी।
भारत में सड़क दुर्घटनाएं लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोगों की जान जाती है और लाखों लोग घायल होते हैं। मुआवजे के लिए पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें देरी आम बात है। ऐसे में ब्याज की रकम पीड़ितों के नुकसान की भरपाई का एक अहम हिस्सा होती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज पर टैक्स हटने से मुआवजा ज्यादा कारगर और न्यायपूर्ण होगा। यह फैसला न सिर्फ पीड़ितों को आर्थिक राहत देगा, बल्कि मामलों के समय पर निपटारे को भी प्रोत्साहित कर सकता है, क्योंकि टैक्स और रिफंड से जुड़ी जटिलताएं कम होंगी।
पीड़ित अधिकार समूहों, कानूनी विशेषज्ञों और बीमा कंपनियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान है और इससे मुआवजे का असली उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत टैक्स नियमों को सरल, पारदर्शी और मानवीय बनाया जा रहा है। बजट 2026–27 में जहां एक ओर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को सीधी राहत देने वाले फैसलों को भी प्राथमिकता दी गई है।
इस टैक्स छूट से लाखों ऐसे परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो सड़क दुर्घटनाओं के कारण पहले ही गहरे सदमे और आर्थिक संकट से गुजर चुके हैं। अब मुआवजे पर टैक्स कटौती के कारण मिलने वाला न्याय कम नहीं होगा और पीड़ितों को उनकी वास्तविक जरूरतों के लिए पूरी सहायता मिल सकेगी।
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