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बाइक-स्कूटर चलाते समय हेलमेट से जुड़ी 4 बड़ी गलतफहमियां, जानें कैसे रखें खुद को सुरक्षित

बाइक-स्कूटर चलाते समय हेलमेट से जुड़ी 4 बड़ी गलतफहमियां, जानें कैसे रखें खुद को सुरक्षित

बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट पहनना सड़क सुरक्षा के सबसे जरूरी नियमों में शामिल है। हालांकि, सिर्फ सिर पर हेलमेट पहन लेना पर्याप्त नहीं है। हेलमेट की क्वालिटी, सही साइज, फिटिंग और स्ट्रैप का लॉक होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई लोग हेलमेट को लेकर कुछ ऐसी गलतफहमियां रखते हैं, जो दुर्घटना के समय गंभीर नुकसान का कारण बन सकती हैं। आइए जानते हैं हेलमेट से जुड़ी 4 आम गलतफहमियों के बारे में।

1. कोई भी हेलमेट पहनना पर्याप्त है


कई लोग केवल चालान से बचने के लिए सड़क किनारे मिलने वाला सस्ता या लोकल हेलमेट खरीद लेते हैं। लेकिन हेलमेट खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच करना जरूरी है।


कम गुणवत्ता वाला या सुरक्षा मानकों के अनुरूप न बना हेलमेट दुर्घटना के दौरान सिर को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे सकता। इसलिए केवल हेलमेट पहनना ही नहीं, बल्कि उचित सुरक्षा मानक वाला हेलमेट चुनना भी जरूरी है।


2. हेलमेट का स्ट्रैप बांधना जरूरी नहीं


कुछ लोग हेलमेट पहनने के बाद उसकी स्ट्रैप ढीली छोड़ देते हैं या लॉक नहीं करते। यह बेहद जोखिम भरी आदत है। दुर्घटना के दौरान हेलमेट सिर से निकल सकता है और उस स्थिति में वह सिर की सुरक्षा नहीं कर पाएगा।


इसलिए हर बार बाइक या स्कूटर चलाने से पहले हेलमेट की चिन स्ट्रैप को सही तरीके से बांधकर लॉक करना चाहिए। हेलमेट का सिर पर सुरक्षित तरीके से टिके रहना उसकी प्रभावी सुरक्षा के लिए जरूरी है।


3. हेलमेट के साइज से कोई फर्क नहीं पड़ता


हेलमेट बहुत बड़ा या बहुत छोटा होने पर उसकी सुरक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है। ढीला हेलमेट चलते समय सिर पर हिलता रहता है और दुर्घटना की स्थिति में सही जगह सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाता।



वहीं, जरूरत से ज्यादा टाइट हेलमेट असुविधाजनक हो सकता है। इसलिए हेलमेट खरीदते समय सिर के आकार के अनुरूप सही फिटिंग वाला मॉडल चुनना चाहिए। हेलमेट सिर पर आरामदायक तरीके से फिट होना चाहिए और अनावश्यक रूप से हिलना नहीं चाहिए।


4. हेलमेट तब तक बदलने की जरूरत नहीं जब तक वह टूट न जाए


यह भी आम गलतफहमी है कि हेलमेट केवल टूटने के बाद ही बदलना चाहिए। दुर्घटना में हेलमेट को तेज झटका लगने के बाद उसकी अंदरूनी सुरक्षा संरचना प्रभावित हो सकती है, भले ही बाहर से वह सामान्य दिखाई दे।


हेलमेट के अंदर मौजूद EPS (Expanded Polystyrene) लाइनर प्रभाव को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्घटना के बाद हेलमेट की अंदरूनी संरचना को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए तेज प्रभाव वाली दुर्घटना के बाद हेलमेट को बदलने पर विचार करना चाहिए।


सामान्य इस्तेमाल में भी हेलमेट की स्थिति, उम्र और निर्माता की सलाह के अनुसार उसे समय-समय पर बदलना उचित है। कई मामलों में 3 से 5 साल के आसपास हेलमेट बदलने की सलाह दी जाती है, हालांकि वास्तविक अवधि निर्माता और इस्तेमाल पर निर्भर करती है।


सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान


हेलमेट सड़क पर दोपहिया वाहन चलाने वालों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। सही सुरक्षा मानक वाला हेलमेट, उचित साइज, सही फिटिंग और लॉक की गई स्ट्रैप—इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। दुर्घटना के बाद हेलमेट को केवल बाहरी स्थिति देखकर दोबारा इस्तेमाल करने का फैसला नहीं करना चाहिए।

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