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एमिशन नियमों की मार: यूरोप और यूके में Hyundai i10 की बिक्री बंद की, भारत में फिलहाल जारी रहेगी मौजूदगी

एमिशन नियमों की मार: यूरोप और यूके में Hyundai i10 की बिक्री बंद की, भारत में फिलहाल जारी रहेगी मौजूदगी

दुनियाभर में लगातार सख्त होते जा रहे एमिशन नॉर्म्स का असर अब सीधे ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो पर दिखने लगा है। कई देशों में उत्सर्जन नियम इतने कड़े हो चुके हैं कि पारंपरिक पेट्रोल और डीजल कारों का उत्पादन कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बनता जा रहा है। इसी वजह से बड़े ऑटो ब्रांड तेजी से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इस बदलाव की ताजा मिसाल हुंडई की पॉपुलर एंट्री-लेवल कार Hyundai i10 है, जिसे कंपनी ने यूरोप और यूनाइटेड किंगडम के बाजार से हमेशा के लिए हटाने का फैसला लिया है।
यूरोप और यूके में नए ऑर्डर बंद

हुंडई ने साफ कर दिया है कि यूरोप और यूके में i10 के लिए अब कोई नया ऑर्डर स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, डीलरशिप पर मौजूद स्टॉक खत्म होने तक इसकी बिक्री जारी रहेगी। i10 लंबे समय से यूरोप में बजट सेगमेंट की भरोसेमंद और लोकप्रिय कार मानी जाती रही है, लेकिन नए और सख्त एमिशन नियमों के चलते इसे आगे बनाए रखना कंपनी के लिए व्यावसायिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गया।

तुर्की प्लांट होगा EV के लिए अपग्रेड

Hyundai i10 का प्रोडक्शन तुर्की स्थित हुंडई के प्लांट में किया जाता था। अब कंपनी इसी फैक्ट्री को आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए अपग्रेड करने जा रही है। यह फैसला हुंडई की ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत कंपनी पारंपरिक इंजन वाली कारों की संख्या घटाकर पूरी तरह इलेक्ट्रिक मॉडल्स पर फोकस बढ़ा रही है।

2008 से बना भरोसेमंद नाम


Hyundai i10 को यूके में पहली बार साल 2008 में लॉन्च किया गया था। समय के साथ यह एंट्री-लेवल सेगमेंट की सबसे पसंदीदा कारों में शामिल हो गई। यूरोप और यूके में i10 की कुल बिक्री 3.7 लाख यूनिट्स से ज्यादा रही, जिससे यह हुंडई की सफल सिटी कारों में गिनी जाती है। किफायती कीमत, भरोसेमंद परफॉर्मेंस और आसान मेंटेनेंस इसकी लोकप्रियता की बड़ी वजह रहे।

बजट सेगमेंट में विकल्प हुए सीमित

i10 के बंद होने के बाद यूके में हुंडई की सबसे सस्ती पेशकश अब Instar EV रह गई है, जिसकी कीमत i10 के मुकाबले काफी ज्यादा है। इससे बजट कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि, इस सेगमेंट में Kia Picanto जैसी कुछ पेट्रोल कारें अभी मौजूद हैं, लेकिन यूरोप में लगातार सख्त होते एमिशन नियमों को देखते हुए भविष्य में इन पर भी असर पड़ सकता है। मौजूदा हालात में i10 की यूरोप या यूके में वापसी की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

भारत में फिलहाल सुरक्षित है i10

जहां यूरोप और यूके में Hyundai i10 को बंद कर दिया गया है, वहीं भारतीय बाजार के लिए फिलहाल ऐसी कोई योजना सामने नहीं आई है। भारत में i10 हुंडई की सबसे सफल कारों में से एक रही है। अब तक इसकी कुल वैश्विक बिक्री 3.3 मिलियन यूनिट्स को पार कर चुकी है, जिसमें से 2 मिलियन से ज्यादा यूनिट्स अकेले भारत में बिक चुकी हैं। इसके अलावा i10 को 140 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट भी किया गया है।

भारतीय बाजार में i10 NIOS आज भी हुंडई की टॉप-सेलिंग कारों में शामिल है और कंपनी की मंथली बिक्री में इसका अहम योगदान बना हुआ है। ऑटो इंडस्ट्री जानकारों का मानना है कि जब तक भारत में एमिशन नियम और कड़े नहीं होते या EV इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक i10 जैसे मॉडल्स की भारतीय बाजार में मांग बनी रह सकती है।

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