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Second Hand Car Buying Tips: पुरानी कार खरीदने से पहले इन 7 बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकता है खर्च

Second Hand Car Buying Tips: पुरानी कार खरीदने से पहले इन 7 बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकता है खर्च

आजकल कई लोग नई कार के बजाय सेकंड हैंड कार खरीदना पसंद करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम कीमत में कार मिलने का विकल्प है। हालांकि, पुरानी कार खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। कई बार कार बाहर से चमकदार और अच्छी दिखाई देती है, लेकिन उसके इंजन, गियरबॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स या अन्य जरूरी हिस्सों में खराबी होती है। ऐसे में खरीदारी के बाद मरम्मत पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।


इसलिए सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले उसकी तकनीकी स्थिति, जरूरी दस्तावेज और सर्विस रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में पुरानी कार खरीदने से बचना चाहिए।



1. पानी में डूबी हुई कार खरीदने से बचें



अगर कोई कार बाढ़ या भारी बारिश के दौरान पानी में डूब चुकी है, तो उसे खरीदने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पानी कार की वायरिंग, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार ये खराबियां कार खरीदने के कुछ समय बाद सामने आती हैं।



इसके अलावा, कार की सीटों और केबिन में सीलन, बदबू और जंग की समस्या भी हो सकती है। इसलिए कार की पिछली स्थिति के बारे में जानकारी लें और किसी भरोसेमंद मैकेनिक से उसकी जांच कराएं।



2. बड़े एक्सीडेंट वाली कार लेने से पहले सोचें


अगर किसी कार का बड़ा एक्सीडेंट हुआ है और उसके चेसिस या फ्रेम को नुकसान पहुंचा है, तो ऐसी कार खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। कार की बाहरी बॉडी की मरम्मत करके उसे चमकदार बनाया जा सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उसका अंदरूनी ढांचा भी सुरक्षित है।



खरीदने से पहले चेसिस, फ्रेम, एयरबैग और अन्य सुरक्षा संबंधी हिस्सों की जांच कराएं। यदि कार के ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ है या मरम्मत की गुणवत्ता स्पष्ट नहीं है, तो सौदा करने से बचना बेहतर है।



3. जरूरी दस्तावेज और सर्विस रिकॉर्ड जरूर देखें




सेकंड हैंड कार खरीदते समय रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), वैध इंश्योरेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक है। अगर विक्रेता दस्तावेज दिखाने से बच रहा है या वाहन की जानकारी स्पष्ट नहीं है, तो जल्दबाजी में फैसला न लें।



कार की सर्विस हिस्ट्री से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि समय-समय पर उसकी देखभाल हुई है या नहीं। यदि मीटर पर कम किलोमीटर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ की आशंका की जांच करें। कार की किलोमीटर रीडिंग और सर्विस रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें।



4. बैंक लोन वाली कार के कागजात जांचें



अगर कार पर बैंक का लोन बकाया है, तो खरीदारी से पहले लोन की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। यह सुनिश्चित करें कि बकाया रकम चुकाने, बैंक से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने और वाहन का स्वामित्व ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया क्या होगी।



बिना उचित पुष्टि के सौदा पूरा करने पर भविष्य में RC ट्रांसफर या अन्य दस्तावेजी प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। इसलिए संबंधित बैंक और परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से जरूरी जानकारी की पुष्टि करें।



5. बंद हो चुके मॉडल की कार खरीदने से पहले पार्ट्स की उपलब्धता देखें



कुछ कार मॉडल बंद हो चुके हैं या उनकी निर्माता कंपनियों ने भारत में कारोबार बंद कर दिया है। ऐसी कार खरीदने से पहले यह पता करना जरूरी है कि उसके स्पेयर पार्ट्स और सर्विस सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं।



अगर जरूरी पार्ट्स मिलना मुश्किल है, तो खराबी आने पर कार की मरम्मत में अधिक समय और पैसा लग सकता है। इसलिए सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला न करें। कार की मौजूदा स्थिति, पार्ट्स की उपलब्धता और संभावित रखरखाव खर्च को भी ध्यान में रखें।



6. टैक्सी में इस्तेमाल हुई कार की जांच कराएं


पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल की गई कार खरीदते समय उसकी वास्तविक स्थिति की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। अधिक इस्तेमाल के कारण इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन जैसे हिस्सों पर ज्यादा घिसावट हो सकती है। हालांकि, केवल टैक्सी में इस्तेमाल होना ही कार को खराब साबित नहीं करता।


खरीदारी से पहले कार की सर्विस हिस्ट्री, ओडोमीटर रीडिंग और तकनीकी स्थिति की जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर किसी विशेषज्ञ मैकेनिक से निरीक्षण करवाएं।

7. टेस्ट ड्राइव के दौरान इन संकेतों पर ध्यान दें


पुरानी कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर लें। इस दौरान कुछ संकेतों पर विशेष ध्यान दें:

साइलेंसर से नीला धुआं: इंजन में ऑयल जलने या अन्य खराबी का संकेत हो सकता है। इंजन की जांच कराएं।


गियर बदलते समय झटके: गियरबॉक्स या ट्रांसमिशन में समस्या होने की आशंका हो सकती है।


कार का एक तरफ खिंचना: टायर, व्हील अलाइनमेंट, सस्पेंशन या ब्रेक से जुड़ी समस्या हो सकती है।


असामान्य आवाजें: इंजन, सस्पेंशन या अन्य हिस्सों की खराबी का संकेत हो सकती हैं।


डैशबोर्ड पर चेतावनी लाइट: किसी सिस्टम में खराबी का संकेत हो सकता है। खरीदने से पहले कारण की पुष्टि करें।


खरीदने से पहले मैकेनिक से कराएं पूरी जांच


सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक से उसकी प्री-पर्चेज इंस्पेक्शन (Pre-Purchase Inspection) कराना समझदारी है। इसमें इंजन, गियरबॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, चेसिस, फ्रेम, ब्रेक और सस्पेंशन की स्थिति जांची जानी चाहिए। साथ ही, RC, इंश्योरेंस, सर्विस रिकॉर्ड और बकाया लोन की जानकारी भी सत्यापित करें।

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