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भारत में इलेक्ट्रिक कारों की रफ्तार तेज, पहली तिमाही में EV रजिस्ट्रेशन 90% उछला; टाटा और महिंद्रा ने दिखाई दमदार बढ़त

भारत में इलेक्ट्रिक कारों की रफ्तार तेज, पहली तिमाही में EV रजिस्ट्रेशन 90% उछला; टाटा और महिंद्रा ने दिखाई दमदार बढ़त

भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों (EV) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करीब 90 प्रतिशत बढ़कर 82,737 यूनिट पर पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 43,710 यूनिट था। वाहन पोर्टल के पंजीकरण आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती ईंधन कीमतों और कम रनिंग कॉस्ट के कारण उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है।


पूरी तिमाही के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी रही। अप्रैल में 24,963 यूनिट, मई में 27,320 यूनिट और जून में यह बढ़कर 30,454 यूनिट तक पहुंच गई, जो बाजार में लगातार बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है।



टाटा मोटर्स बनी सबसे बड़ी खिलाड़ी



इस अवधि में टाटा मोटर्स ने सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 32,283 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण दर्ज किया। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही के 15,794 यूनिट की तुलना में 104 प्रतिशत अधिक है।



जून 2026 में कंपनी की कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 63,083 यूनिट रही, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 37,237 यूनिट थी। यानी कंपनी की कुल बिक्री में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।



वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाटा मोटर्स की कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 46 प्रतिशत बढ़कर 1,82,574 यूनिट पर पहुंच गई।



केवल जून महीने में कंपनी ने 14,800 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे, जबकि पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 5,228 यूनिट था। पूरी तिमाही में कंपनी की ईवी बिक्री 112 प्रतिशत बढ़कर 34,467 यूनिट हो गई।



महिंद्रा की भी शानदार छलांग



महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुने होकर 20,112 यूनिट तक पहुंच गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 10,144 यूनिट थे।



हुंडई को झटका



वहीं हुंडई मोटर इंडिया के लिए यह तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन रजिस्ट्रेशन 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गए, जिससे इस सेगमेंट में उसकी हिस्सेदारी कमजोर होती दिखाई दी।



ईंधन की महंगाई बनी EV की ताकत



उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में आई तेजी ने बड़ी संख्या में ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की रनिंग कॉस्ट अपेक्षाकृत स्थिर रही, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा।



कीमतें बढ़ीं, फिर भी मांग बरकरार



दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग ऐसे समय में बढ़ी है, जब वाहन निर्माता कंपनियां उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई और परिचालन खर्च बढ़ने का हवाला देते हुए लगातार कीमतों में इजाफा कर रही हैं।



* 1 जुलाई से टाटा मोटर्स ने अपने पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। वहीं, कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है।


* हुंडई मोटर इंडिया ने अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में 12,800 रुपये तक की वृद्धि की है।


* मारुति सुजुकी इंडिया ने अलग-अलग मॉडलों की कीमतों में 30,000 रुपये तक बढ़ोतरी की है।


* महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक वृद्धि की है, जबकि विभिन्न मॉडलों में औसत बढ़ोतरी 1.6 प्रतिशत रही है।



बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले महीनों में भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार और तेज गति से आगे बढ़ सकता है।

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