मैनुअल गियर वाली कार चलाना दिमाग के लिए फायदेमंद! रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
देश और दुनिया में आटोमैटिक गाड़ियों का चलन बढ़ गया है, लेकिन आज भी ऐसे कार प्रेमियों की कमी नहीं है जो मैनुअल गियरबॉक्स (मैनुअल ट्रांसमिशन) को चाहते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो मैनुअल कारों के वजूद को बचाने की वकालत करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है। एक नई रिसर्च से पता चला है कि अगर आप बढ़ती उम्र में अपने दिमाग को तंदुरुस्त और एक्टिव रखने के लिए रोज एक बेहतरीन 'वर्कआउट' देना चाहते हैं, तो आपको मैनुअल गाड़ी चलाना जारी रखना चाहिए। जापान में हुए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मैनुअल गियर वाली कार चलाने से दिमाग का एक खास हिस्सा उत्तेजित होता है, जो ऑटोमैटिक कार चलाने से बिल्कुल नहीं होता। सीधे शब्दों में कहें तो मैनुअल कार चलाना आपके दिमाग की सेहत को काफी बेहतर बना सकता है।
दिमाग पर कैसे असर डालती है मैनुअल ड्राइविंग
यह महत्वपूर्ण रिसर्च तोहोकू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट, एजिंग एंड कैंसर में न्यूरोइमेजिंग का काम संभालने वाले प्रोफेसर रियूटा कावाशिमा द्वारा की गई है।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का एक्टिव होना: प्रोफेसर कावाशिमा की रिसर्च में पाया गया कि मैनुअल कार चलाने की जो पूरी शारीरिक प्रक्रिया होती है, वह इंसानी दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स वाले हिस्से को पूरी तरह सक्रिय कर देती है।
क्या काम करता है यह हिस्सा: दिमाग का यही वह क्षेत्र है जो हमारी याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता को संभालता है।
एक साथ कई मोर्चों पर काम: जब आप एक मैनुअल कार चलाते हैं, तो आपका दिमाग एक ही समय में ट्रैफिक की रफ्तार को भांप रहा होता है, पैर से क्लच को दबाने-छोड़ने को कंट्रोल करता है, हाथ से गियर बदलता है और पैर से एक्सीलेटर का सही तालमेल बिठाता है। इन सभी चीजों के बीच लगातार संतुलन बनाए रखने के लिए एक उच्च स्तर के जुड़ाव की जरूरत होती है, जो हर पल ड्राइवर का ध्यान पूरी तरह बांध कर रखता है।
मैनुअल कार कराती है दिमागी कसरत
दिमाग को हर दिन इन सभी कामों में एक साथ उलझाए रखना उसके लिए एक हल्के व्यायाम की तरह काम करता है।
न्यूरल पाथवेज का सक्रिय होना: यह दिमागी कसरत न्यूरल पाथवेज को उत्तेजित करती है, जिससे उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक कार्यों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
ऑटोमैटिक गाड़ियां क्यों हैं पीछे: इसके उलट, किसी ऑटोमैटिक या सेमी-ऑटोनॉमस गाड़ी में आराम से बैठकर सफर करने या उसे चलाने में दिमाग को इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। जिससे वह इस जरूरी कसरत से चूक जाता है। मैनुअल गाड़ी दिमाग को जिस तरह एक्टिव रखती है, उसका मुकाबला ऑटोमैटिक गाड़ियां कभी नहीं कर सकतीं।
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