पेट्रोल भरवाते समय बार-बार न दबाएं नोजल का ट्रिगर! जानें क्या है पूरा सच
पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच वाहन में ईंधन भरवाना आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खर्च है। ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि पेट्रोल पंप पर नोजल के ट्रिगर को बार-बार दबाने और छोड़ने से क्या वास्तव में कम पेट्रोल मिलता है? सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे अक्सर सामने आते हैं, लेकिन इस मामले में तकनीकी पहलुओं को समझना जरूरी है। क्या ट्रिगर बार-बार दबाने से कम मिलता है पेट्रोल? पेट्रोल भरते समय नोजल का लीवर बार-बार दबाने और छोड़ने से ईंधन का प्रवाह रुक-रुककर हो सकता है। हालांकि, केवल इस प्रक्रिया से मीटर हवा को पेट्रोल के रूप में गिनने लगता है, ऐसा मानना सही नहीं है। रुक-रुककर ईंधन भरने से नोजल का ऑटो-कट सिस्टम प्रभावित हो सकता है और टैंक पूरी तरह भरने से पहले ही ईंधन का प्रवाह रुक सकता है। इसलिए सामान्य और समान गति से पेट्रोल भरवाना बेहतर है। हालांकि, कम ईंधन मिलने की आशंका होने पर केवल ट्रिगर के इस्तेमाल को ही गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कैसे काम करता है नोजल का ऑटो-कट सिस्टम? पेट्रोल पंप के नोजल में ऑटो-कट व्यवस्था होती है, जिसका उद्देश्य टैंक भरने पर ईंधन का प्रवाह रोकना और पेट्रोल को बाहर छलकने से बचाना है। जब टैंक में ईंधन का स्तर नोजल के सिरे तक पहुंचता है, तो यह व्यवस्था प्रवाह बंद कर देती है। यदि नोजल का ट्रिगर बार-बार दबाया और छोड़ा जाए, तो प्रवाह असमान हो सकता है। ऐसी स्थिति में ऑटो-कट सिस्टम समय से पहले सक्रिय हो सकता है। इसलिए अटेंडेंट से सामान्य गति से ईंधन भरने के लिए कह सकते हैं। पेट्रोल भरवाते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान 1. जीरो रीडिंग जरूर देखें: पेट्रोल भरना शुरू होने से पहले डिजिटल मीटर पर शून्य रीडिंग की पुष्टि करें। 2. लीटर और राशि पर नजर रखें: ईंधन भरते समय मीटर पर दिखाई जा रही मात्रा और कुल कीमत को देखते रहें। 3. सामान्य गति से ईंधन भरवाएं: अटेंडेंट से नोजल का ट्रिगर बार-बार दबाने के बजाय सामान्य और समान गति से ईंधन भरने का अनुरोध करें। 4. संदेह होने पर 5-लीटर टेस्ट मांगें: यदि आपको ईंधन की मात्रा पर संदेह हो, तो पेट्रोल पंप पर उपलब्ध निर्धारित माप वाले पांच लीटर के माप पात्र से मात्रा की जांच कराने का अनुरोध करें। जागरूकता से बच सकता है आर्थिक नुकसान पेट्रोल पंप पर सतर्क रहना उपभोक्ताओं के हित में है। जीरो रीडिंग की जांच, मीटर पर नजर और संदेह होने पर माप परीक्षण की मांग से ईंधन की मात्रा को लेकर उठने वाले सवालों की जांच की जा सकती है। किसी भी अनियमितता का संदेह होने पर पंप प्रबंधन से शिकायत करें और जरूरत पड़ने पर संबंधित तेल कंपनी या माप-तौल विभाग से संपर्क करें।
@रफ्तार की बादशाह हैं ये टाॅप 5 कारें, मर्सिडीज़, पोर्श भी हैं पीछे
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