नई कार में एंटी-रस्ट कोटिंग जरूरी या फिजूलखर्च? जानिए कब करना चाहिए और कब नहीं
नई कार खरीदने के बाद मैकेनिक सलाह देते हैं कि गाड़ी के नीचे एंटी-रस्ट कोटिंग करा लें। लेकिन क्या वाकई कार को इसकी जरूरत होती है या सिर्फ डीलरशिप की कमाई का सिर्फ जरिया है? आइए जानते हैं कि इसकी पूरी सच्चाई क्या है। क्या है एंटी-रस्ट कोटिंग यह कार की चेसिस और अंडरबॉडी पर लगाई जाने वाली एक सेफ्टी लेयर होती है जो कार के मेटल को पानी, नमी, नमक और सड़क के कचरे से बचाती है जिससे जंग न लगे। आधुनिक कार निर्माता कंपनियां गाड़ियों को बनाने के ही दौरान अंडरबॉडी पर गैल्वनाइज्ड स्टील और फैक्ट्री-फिटेड एंटी-रस्ट सुरक्षा देती है। ज्यादातर नई कारें 5 से 10 साल तक बिना किसी एक्सट्रा कोटिंग के जंग से सुरक्षित रहती है। किसे पड़ती है जरूरत कोस्टल क्षेत्रों में रहने वाले: अगर आप चेन्नई, गोवा या मुंबई जैसे समुद्री इलाकों में रहते हैं जहां हवा में नमी और नमक का स्तर ज्यादा होता है। जलभराव वाले इलाके: अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां बारिक के मौसम में सड़कों पर पानी और कीचड़ जमा हो जाता है तो आपको इसकी जरूरत पड़ सकती है। पुरानी गाड़ियां: अगर आपकी कार 5-6 साल पुरानी हो चुकी है और उसकी फैक्ट्री कोटिंग घिस गई है तो आप इसे करा सकते हैं। कब होता है फिजूलखर्च अगर आप मध्य भारत के इलाकों में रहत हैं जो ज्यादातर सूखे और सामान्य रहते हैं तो नई कार पर तुरंत ही एंटी-रस्ट कोटिंग कराना पैसे की बर्बादी है। इसके अलावा, अगर कोटिंग करने से पहला कार का निचला हिस्सा ठीक से धोकर सुखाया न जाए तो नमी अंदर ही फंस जाती है। इससे जंग रुकने की बजाय और तेजी से लगने लगती है।
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