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दिल्ली की नई ईवी नीति: पहले 1,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 साल तक 'नो एंट्री' से मिलेगी छूट

दिल्ली की नई ईवी नीति: पहले 1,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 साल तक 'नो एंट्री' से मिलेगी छूट

दिल्ली में कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को प्रदूषण मुक्त बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार को तेज करने के लिए सरकार ने आकर्षक दांव खेला है। दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत शहर में पंजीकृत होने वाले पहले 1,000 इलेक्ट्रिक N2 कैटेगरी के ट्रकों को दिल्ली की सीमाओं और सड़कों पर लगने वाले "नो एंट्री" के समय प्रतिबंधों से पूरे 10 साल की भारी छूट दी जाएगी। सरकार का यह कदम माल ढुलाई क्षेत्र में डीजल गाड़ियों की जगह क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) को बढ़ावा देने के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

ये शर्त रखी गई है 


नीति के मुताबिक, इस बेहतरीन इंसेंटिव (प्रोत्साहन) का फायदा उठाने के लिए वाहन मालिकों को कुछ तय समय-सीमा का ध्यान रखना होगा। 
शुरुआती खरीदारों को मौका: यह खास रियायत केवल उन्हीं पहले 1,000 N2 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को मिलेगी, जिन्हें नीति के लागू होने के शुरुआती दिनों में खरीदा जाएगा।


तीन महीने की समय-सीमा: इन 1,000 ट्रकों की खरीद इस नीति के आधिकारिक नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी होने के तीन महीने के भीतर की जानी अनिवार्य है। आमतौर पर दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारी और मध्यम मालवाहकों पर समय-समय पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन इन भाग्यशाली 1,000 ई-ट्रकों के लिए नियम अलग होंगे:


हर पाबंदी से आजादी: इस 10 वर्षीय छूट का मतलब है कि ये इलेक्ट्रिक ट्रक उस प्रतिबंधित समय (नो एंट्री आवर्स) के दौरान भी दिल्ली की सड़कों पर बेधड़क दौड़ सकेंगे, जब सामान्य मालवाहक गाड़ियों के प्रवेश पर रोक होती है।


विशेष परिस्थितियों में भी राहत: चाहे शहर में यातायात प्रबंधन के उपाय लागू हों, कोई बड़ा वीआईपी या राष्ट्रीय कार्यक्रम चल रहा हो, या फिर प्रदूषण-नियंत्रण से जुड़ी पाबंदियां लगी हों- इन ट्रकों को हर हाल में परिचालन की अनुमति होगी।


इस नीति में शामिल 'N2 कैटेगरी' के वाहन असल में कौन से हैं?


इस छूट के दायरे में आने वाले वाहनों को उनके वजन और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।


मीडियम-ड्यूटी ट्रक्स: N2 कैटेगरी के तहत मध्यम-भार वाले मालवाहक वाहन आते हैं, जिनका कुल वजन 3.5 टन से लेकर 12 टन के बीच होता है।


रोजमर्रा का कमर्शियल इस्तेमाल: इस श्रेणी के ट्रकों का उपयोग आमतौर पर शहर के भीतर और आसपास के इलाकों में कमर्शियल सामान, औद्योगिक आपूर्ति, कंस्ट्रक्शन मटेरियल (भवन निर्माण सामग्री) और अन्य भारी कार्गो को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है।

@बिना पेट्रोल और डीज़ल के चलेगी भविष्य की यह कार

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